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बुधवार, 25 मार्च 2026

बवासीर है? अब नहीं रहेगी! जानिए बवासीर का पक्का और असरदार घरेलू इलाज!

बवासीर गुदा मार्ग की बीमारी है। इस रोग के होने का मुख्य कारण कब्ज होता है। अधिक मिर्च मसाले एवं बाहर के भोजन का सेवन करने के कारण पेट में कब्ज उत्पन्न होने लगती है जो मल को अधिक शुष्क एवं कठोर करती है इससे मल करते समय अधिक जोर लगना पड़ता है और अर्श (बवासीर) रोग हो जाता है।

यह कई प्रकार की होती है, जिनमें दो मुख्य हैं- खूनी बवासीर और वादी बवासीर। यदि मल के साथ खून बूंद-बूंद कर आये तो उसे खूनी बवासीर कहते हैं। यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और उससे मल के साथ खून न आए तो उसे वादी बवासीर कहते हैं।

अर्श (बवासीर) रोग में मलद्वार पर मांसांकुर (मस्से) निकल आते हैं और उनमें शोथ (सूजन) और जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है। रोगी को कहीं बैठने उठने पर मस्से में तेज दर्द होता है। बवासीर की चिकित्सा देर से करने पर मस्से पककर फूट जाते हैं और उनमें से खून, पीव आदि निकलने लगता है।

रोग के प्रकार : अर्श (बवासीर) 6 प्रकार का होता है- पित्तार्श, कफार्श, वातार्श सन्निपातार्श, संसार्गर्श और रक्तार्श (खूनी बवासीर)

कफार्श : कफार्श बवासीर में मस्से काफी गहरे होते है। इन मस्सों में थोड़ी पीड़ा, चिकनाहट, गोलाई, कफयुक्त पीव तथा खुजली होती है। इस रोग के होने पर पतले पानी के समान दस्त होते हैं। इस रोग में त्वचा, नाखून तथा आंखें पीली पड़ जाती है।

वातजन्य बवसीर : वात्यजन अर्श (बवासीर) में गुदा में ठंड़े, चिपचिपे, मुर्झाये हुए, काले, लाल रंग के मस्से तथा कुछ कड़े और अलग प्रकार के मस्से निकल आते हैं। इसका इलाज न करने से गुल्म, प्लीहा आदि बीमारी हो जाती है।

संसगर्श : इस प्रकार के रोग परम्परागत होते हैं या किसी दूसरों के द्वारा हो जाते हैं। इसके कई प्रकार के लक्षण होते हैं।

पितार्श : पितार्श अर्श (बवासीर) रोग में मस्सों के मुंख नीले, पीले, काले तथा लाल रंग के होते हैं। इन मस्सों से कच्चे, सड़े अन्न की दुर्गन्ध आती रहती है और मस्से से पतला खून निकलता रहता है। इस प्रकार के मस्से गर्म होते हैं। पितार्श अर्श (बवासीर) में पतला, नीला, लाल रंग का दस्त (पैखाना) होता है।

सन्निपात : सन्निपात अर्श (बवासीर) इस प्रकार के बवासीर में वातार्श, पितार्श तथा कफार्श के मिले-जुले लक्षण पाये जाते हैं।

खूनी बवासीर : खूनी बवासीर में मस्से चिरमिठी या मूंग के आकार के होते हैं। मस्सों का रंग लाल होता है। गाढ़ा या कठोर मल होने के कारण मस्से छिल जाते हैं। इन मस्सों से अधिक दूषित खून निकलता है जिसके कारण पेट से निकलने वाली हवा रुक जाती है।

बवासीर या अर्श होने के कारण :

अर्श रोग (बवासीर) की उत्पत्ति कब्ज के कारण होती है। जब कोई अधिक तेल-मिर्च से बने तथा अधिक मसालों के चटपटे खाद्य-पदार्थों का अधिक सेवन करता है तो उसकी पाचन क्रिया खराब हो जाती है।

पाचन क्रिया खराब होने के कारण पेट में कब्ज बनती है जो पेट में सूखेपन की उत्पत्ति कर मल को अधिक सूखा कर देती है। मल अधिक कठोर हो जाने पर मल करते समय अधिक जोर लगाना पड़ता है।

अधिक जोर लगाने से मलद्वार के भीतर की त्वचा छिल जाती है। जिसके कारण मलद्वार के भीतर जख्म या मस्से बन जाने से खून निकलने लगता है।

अर्श रोग (बवासीर) में आहार की लापरवाही तथा चिकित्सा में अधिक देरी के कारण यह अधिक फैल जाता है।

बवासीर या अर्श होने के लक्षण :

अर्श रोग के होने पर मलद्वार के बाहर की ओर मांसांकुर (मस्से) निकल आते हैं। मांसांकुर (मस्से) से खून शौच के साथ खून पतली रेखा के रुप में निकलता है।

रोगी को चलने-फिरने में परेशानी होना, पांव लड़खड़ाना, नेत्रों के सामने अंधेरा छाना तथा सिर में चक्कर आने लगना आदि इसके लक्षण है। इस रोग के होने पर स्मरण-शक्ति खत्म होने लगती है।

बवासीर | अर्श | पाइल्स के घरेलु उपाय | Piles | Bawasir

हारसिंगार : हारसिंगार के 2 ग्राम फूलों को 30 ग्राम पानी में रात को भिगोकर रखें। सुबह फूलों को पानी में मसल कर छान लें और 1 चम्मच खांड़ मिलाकर खाली पेट खायें। रोज 1 सप्ताह खाने से बवासीर मिट जाती है।

हारसिंगार का (बिना छिलके का) बीज 10 ग्राम तथा कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर गोलियां बनाकर खायें। रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक होती है।

हारसिंगार के बीजों को छील लें। 10 ग्राम बीज में 3 ग्राम कालीमिर्च मिलाकर पीसकर गुदा पर लगाने से बादी बवासीर ठीक होती है।

कपूर : कपूर, रसोत, चाकसू और नीम का फूल सबको 10-10 ग्राम कूट कर पाउडर बनालें। मूली को लम्बाई में बीच से काटकर उसमें सबके पाउडर को भरें और मूली को कपड़े से लपेटे तथा मिट्टी लगाकर आग में भून लें। भुन जाने पर मूली के ऊपर से मिट्टी और कपड़े को उतारकर उसे शिलबट्टे (पत्थर) पर पीस लें और मटर के बराबर गोलियां बना लें। 1 गोली प्रतिदिन सुबह खाली पेट पानी से लेने पर 1 सप्ताह में ही बवासीर ठीक हो जाती है।

वनगोभी : वनगोभी के पत्तों को कूटकर उसका रस निकालकर दिन में तीन से चार बार बवासीर के मस्सों पर लगायें। इसको लगाने से एक सप्ताह में ही मस्सें ठीक हो जाते हैं।

मूली : मूली के 125 मिलीलीटर रस में 100 ग्राम जलेबी को मिलाकर एक घण्टे तक रखें। एक घण्टे बाद जलेबी को खाकर रस को पी लें। इस क्रिया को एक सप्ताह तक करने से बवासीर रोग ठीक हो जाता है।

रीठा या अरीठा : रीठा के छिलके को कूटकर आग पर जला कर कोयला बना लें। इसके कोयले के बराबर मात्रा में पपरिया कत्था मिलाकर चूर्ण बनाकर रखें। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में लेकर मलाई या मक्खन में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से मस्सों में होने वाली खुजली व जख्म नष्ट होते हैं।

या रीठा के छिलके को जलाकर भस्म बनायें और 1 ग्राम शहद के साथ चाटने से बवासीर में खून का गिरना बन्द हो जाता है।

चित्रक : शरीर के जिस भाग में भी दर्द हो अथवा बवासीर का रोग हो, ऐसे में चित्रक के ताजा फूलों का लेप सुबह शाम दर्द वाली जगह पर और बवासीर में मस्सों पर करना चाहिए। दस दिन के प्रयोग से ही बवासीर के मस्से ठीक हो जाएंगे तथा दर्द से मुक्ति मिलेगी।

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

बवासीर काˈ सिर्फ 7 दिन में जड़ से सफाया कर देगा रीठा, ऐसे ही इसके 55 अद्भुत फायदे जान चौंक जाएंगे आप…!!

बवासीर का सिर्फ 7 दिन में जड़ से सफाया : यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ और मरीजो पर प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीज लाभान्वित हुए यानि कि 90 प्रतिशत सफल है तो आइये जाने आप उस नुस्खे के बारे में।अरीठे या रीठा (Soap nut) के फल में से बीज निकाल कर शेष भाग को लोहे की कढाई में डालकर आंच पर तब तक चढ़ाए रखे जब तक वह कोयला न बन जाए जब वह जल कर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतार कर सामान मात्रा में पपडिया कत्था मिलाकर कपडछन (सूती कपडे से छान कर) चूर्ण कर ले बस अब ये औषिधि तैयार है।

औषिधि सेवन करने का तरीका :इस तैयार औषिधि में से एक रत्ती (125मिलीग्राम ) लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम लेते रहे, इस प्रकार सात दिन तक दवाई लेनी होती है।
इस औषिधि के मात्र सात दिन तक लेते रहने से ही कब्ज, बवासीर की खुजली, बवासीर से खून बहना आदि दूर होकर मरीज को राहत महसूस करने लगता है।
यदि मरीज इस रोग के लिए सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो उन्हें हर छ: महीने के बाद फिर से 7 दिन का यह कोर्स बिलकुल इसी प्रकार दोहरा लेना चाहिए।

संस्कृत – अरिष्ट ,रक्तबीज,मागल्य
हिन्दी- रीठा,अरीठा ,
गुजराती- अरीठा
मराठी- रीठा
मारवाड़ी-अरीठो
पंजाबी- रेठा
कर्नाटक-कुकुटेकायि
औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ :ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है । देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है कई रोगों में तो दवाई से ज्यादा तो पथ्य आहार ज़्यादा कारगर होता है।

औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं :मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।
औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं :उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।

अरीठा या रीठा के फल में सैपोनिन, शर्करा और पेक्टिन नामक कफनाशक पदार्थ पाया जाता है। इसके बीज में 30 प्रतिशत चर्बी होती है। जिसका उपयोग साबुन बनाने में किया जाता है। यह त्रिदोषनाशक और ग्रहों को दूर भगाता है। रीठा का उपयोग उल्टी लाने , दस्तावर, हानिकारक कीटाणु और कफनाशक, गर्भाशय विशेषकर अफीम का जहर दूर करने में किया जाता है। इसका विशेष प्रयोग कफवात रोगों में किया जाता है।
अरीठा या रीठा के छिलकों को पानी में पीसकर चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं। चेहरे में निखार आता है। रीठा के दानों को जलाकर राख बना लें। इसके बाद इसमें भूनी फिटकरी मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दांत मजबूत साफ और निरोग रहते हैं। आधे सिर के दर्द वाले रोगी के दूसरी ओर नाक के छेद में रीठा के छिलके को पानी में पीसकर 2 बूंद टपका दें यह काफी तेज होता है इसे सहन करें। इससे माइग्रेन ठीक होने पर दोबारा नहीं होता है। रीठे का छिलका 20 ग्राम और हराकसीस 10 ग्राम को पीसकर चने के बराबर की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें।

1 गोली खाली पेट पानी से सेवन करने से 10-12 दिन में बवासीर के मस्से सूख जाते हैं और बवासीर ठीक हो जाती है। 75 ग्राम रीठे की गुठली की गिरी को पीसकर और छानकर इसमें 75 ग्राम खांड मिला दें। यह 5-5 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से बलवीर्य अधिक होता है। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रीठे की पिसी मींगी को मलाई में लपेटकर गर्म पानी से निगलने से बलगम ढीला होकर निकल जाता है और दमा रोगी को एक सप्ताह तक सेवन करने से आराम मिलता है। रीठे के छिलके को पीसकर आधा ग्राम पानी सुबह देने से मिर्गी ठीक हो जाती है।

बवासीर (अर्श) : रीठा के पीसे हुए छिलके को दूध में मिलाकर बेर के बराबर गोलियां बना लें। रोजाना सुबह-शाम 1-1 गोली नमक तथा छाछ के साथ लेने से बवासीर के रोग में आराम आता है।
रीठा के छिलके को जलाकर उसके 10 ग्राम भस्म (राख) में 10 ग्राम सफेद कत्था मिलाकर पीस लें। इस आधे से 1 ग्राम चूर्ण को रोजाना सुबह पानी के साथ लेने से बवासीर के रोग में आराम आता है।
संग्रहणी : 4 ग्राम रीठा को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर गर्म करें। जब तक झाग न उठ जायें। तब तक गर्म करते रहें। उसके बाद इसे हल्का गर्म-गर्म पीने से संग्रहणी अतिसार (बार-बार दस्त आना) के रोगी का रोग दूर हो जाता है।
माहवारी सम्बंधी परेशानियां : रीठे का छिलका निकालकर उसे धूप में सुखा लें। फिर उसमें रीठा का 2 ग्राम चूर्ण शहद के साथ सेवन करते हैं। यह माहवारी सम्बंधी रोगों की सबसे बड़ी कारगर दवा है।
कान में मैल जमना : रीठे के पानी को किसी छोटी सी पिचकारी या सिरिंज (वह चीज जिससे किसी चीज को कान में डाला जाये) में भरकर कान में डाल दें। इससे कान के अंदर मैल या जो कुछ भी होगा वह मुलायम हो जायेगा फिर किसी रूई की मदद से इसे निकाल लें।
जुकाम : रीठे के छिलके और कायफल को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सूंघने से जुकाम दूर हो जाता है।
नजला, नया जुकाम : 10-10 ग्राम रीठा का छिलका, कश्मीरी पत्ता और धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को नाक से सूंघने से जुकाम में लाभ होता है।
उपदंश (सिफलिश) : रीठे का छिलका पिसा हुआ पानी में मिलाकर चने के बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। 1 गोली दही में लपेटकर सुबह के समय खायें। थोड़ी दही ऊपर से खाने से उपदंश रोग में लाभ मिलता है। परहेज में नमक और गर्म चीजें न खायें।
मुर्च्छा (बेहोशी) : पानी में रीठे को पीसकर 2-3 बूंदे पानी नाक में डालने से बेहोश रोगी जल्द ही होश में आ जाता है।

गठिया रोग : गठिया के दर्द को दूर करने के लिए रीठा का लेप करने से लाभ मिलता है।
फोड़ा : सिर के फोड़े पर रीठा का लेप करने से उसकी सूजन और दर्द ठीक हो जाता है।
दाद : 50 ग्राम रीठा की छाल, सड़ा हुआ गोला, नारियल, सड़ी गली सुपारी और 100 मिलीलीटर तिल का तेल और 400 मिलीलीटर पानी के साथ घोलकर और पानी में ही मिलाकर हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें। जब पानी जल जाये और केवल तेल बाकी रह जाये तो इसे उतारकर छान लें। इस तेल को लगाने से छाजन, दाद, खुजली, चकते, फोड़े-फुन्सी आदि सारे त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं।
गुल्यवायु हिस्टीरिया : 4 या 5 रीठा को पीसकर 1 कप पानी में खूब मसल लें, फिर उससे निकले झाग को एक साफ कपड़े में भिगोकर रोगी को सुंघाने से हिस्टीरिया रोग की बेहोशी दूर हो जाती है।
कामला (पीलिया रोग) : 15 ग्राम रीठे का छिलका और 10 ग्राम गावजवां को रात में 250 मिलीलीटर पानी में भिगों दें। सुबह उठकर ऊपर का पानी पी जाएं। 7 दिनों तक यह पानी पीने से भयंकर पीलिया रोग (पीलिया) पीलिया मिट जाता है।
रीठा के छिलके को पीसकर रात को पानी में भिगोयें। सुबह ये पानी नाक में रोजाना 3 बार 2-2 बूंद टपकाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
कुष्ठ (कोढ़) : रीठा को पीसकर कुष्ठ रोगी (कोढ़ के रोगी) के जख्मों पर लेप करने से जख्म जल्दी भर जाते हैं।
खाज-खुजली : कण्डू और खाज-खुजली होने पर रीठा का लेप करने से लाभ होता है।
सिर का दर्द : पानी में रीठे की छाल को काफी देर तक घिसें और झाग आने पर उसी पानी को गर्म करके सुहाता हुआ 2 या 3 बूंद नाक के नथुनों में डालने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
पानी में रीठे का छिलका घिसकर 2 बूंद नाक के नथुनों में डालने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
बच्चों के विभिन्न रोग : रीठे के छिलके को पीसकर इसका चूर्ण बना लें। यह चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर बच्चे को पिलायें। इससे दस्त के साथ कफ (बलगम) बाहर निकल जाएगा और डब्बा रोग (पसली का चलना) समाप्त हो जायेगा। मूंग के बराबर मात्रा में अभ्रक दूध में घोलकर पिला दें। इससे कफ (बलगम) शीतांग होना, दूध न पीना, मसूढ़े जकड़ जाना आदि रोग दूर हो जाएंगें। इससे पसलियों का दर्द भी दूर हो जायेगा। पसलियों में सरसों का तेल, हींग और लहसुन पकाकर मालिश कर लें। पर छाती मे मालिश न करें।
गंजापन : अगर सिर में गंज (किसी स्थान से बाल उड़ गये हो) तो रीठे के पत्तों से सिर को धोयें और करंज का तेल, नींबू का रस और कड़वे कैथ के बीजों का तेल मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
गले का दर्द : रीठे के छिलके को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शहद में मिलाकर सुबह-शाम रोगी को चटाने से गले का दर्द दूर हो जाता है।
गले के रोग : 10 ग्राम रीठे के छिलके को पीसकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सुबह और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग शाम को पान के साथ या शहद में मिलाकर रोजाना लेने से गले के रोगों में आराम मिलता है।
आधे सिर का दर्द : रीठे के फल को 1-2 कालीमिर्च के साथ घिसकर नाक में 4-5 बूंद टपकाने से आधे सिर का दर्द जल्द ही खत्म हो जाता है।
रात को रीठे की छाल को पानी में डालकर रख दें और सुबह उसको मसलकर कपड़े द्वारा छानकर इसके पानी की 1-1 बूंद नाक में डालने पर आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।
रीठा का चूर्ण नाक से सूंघने से आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द खत्म हो जाता है।
आंखों के रोग : आंखों के रोगों में रीठे के फल को पानी में उबालकर इस पानी को पलकों के नीचे रखने से लाभ होता है।
दांतों के रोग : रीठे के बीजों को तवे पर भून-पीसकर इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई फिटकरी मिलाकर दांतों पर मालिश करने से दांतों के हर तरह के रोग दूर हो जाते हैं।
अनन्त वायु : मासिकस्राव के बाद वायु का प्रकोप होने से स्त्रियों का मस्तिष्क शून्य (सुन्न) हो जाता है। आंखों के आगे अंधकार छा जाता है। दांत आपस में मिल जाते हैं। इस समय रीठे को पानी में घिसकर झाग (फेन) बनाकर आंखों में अंजन (काजल की तरह) लगाने से तुरन्त वायु (गैस) का असर दूर होकर स्त्री स्वस्थ हो जाती है।
रूसी : रीठा से बालों को धोने से बाल चमकदार, काले, घने तथा मुलायम होते हैं और बालों की फारस (रूसी) दूर होती है। रीठा के पानी से सिर को धोने से रूसी दूर हो जाती है।
मिर्गी (अपस्मार) : रीठा के चूर्ण को रोगी को सुंघाने से मिर्गी नष्ट हो जाती है। रीठा के बीज, गुठली और छिलके समेत रीठे को पीसकर मिर्गी के रोगियों को रोजाना सुंघाने से मिर्गी रोग ठीक हो जाता है।

सिर का दर्द : 1 ग्राम रीठा का चूर्ण और 2-3 ग्राम त्रिकुटा चूर्ण को 50 मिलीलीटर पानी में डालकर रखें। सुबह के समय पानी को छानकर अलग शीशी में भर लें। इस पानी की 4-5 बूंदे सुबह के समय खाली पेट रोजाना नाक में डालने से भीतर जमा हुआ कफ (बलगम) बाहर निकल जाता है। नासा रन्ध्र फूल जाते हैं तथा सिर दर्द में भी तुरन्त लाभ मिलता है।
खूनी बवासीर : रीठे के फल में से बीज निकालकर फल के शेष भाग को तवे पर भूनकर कोयला बना लें, फिर इसमें इतना ही पपड़िया कत्था मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर कपडे़ से छान लें। इसमें से 125 मिलीग्राम औषधि सुबह-शाम मक्खन या मलाई के साथ 7 दिनों तक सेवन करें। परहेज में नमक और खटाई नहीं खानी चाहिए।
अतिसार : रीठा की साढ़े 4 ग्राम गिरी को पानी में मसलें, जब इसमें झाग (फेन) पैदा हो जाये तो इस पानी को विसूचिका (हैजा) और अतिसार (दस्त) के रोगी के पिलाने से लाभ होता है।
मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन व कष्ट) : 25 ग्राम रीठे को रातभर 1 लीटर पानी में भिगोकर उसका छना हुआ पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाने से मूत्रकृच्छ (पेशाब करने मे परेशानी) में लाभ मिलता हैं।
नष्टार्तव (मासिकस्राव बंद होना, रजोरोध) : रजोरोध में इसके फल की छाल या गिरी को बारीक पीसकर शहद में मिलाकर बत्ती बनाकर योनि में रखने से रुका हुआ मासिक-धर्म शुरू हो जाता है।
दर्द : रीठा की गिरी के लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चूर्ण को शर्बत या पानी के साथ लेने से शूल (दर्द) खत्म हो जाता है।
मर्दाना ताकत में वृद्धि : रीठे की गिरी को पीसकर इसमें बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर 1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम 1 कप दूध के साथ सेवन करने से पौरुष शक्ति को बढ़ता है।
विष : रीठे के फल को पानी में पकाकर, थोड़ी मात्रा में लेने से उल्टी के द्वारा जहर बाहर निकल जाता है।
अफीम का विष : पानी में रीठे को इतना उबालें कि भाप आने लगे, फिर इस पानी को आधे कप की मात्रा में रोगी को पिलाने से अफीम का जहर उतर जाता है।
बिच्छू का विष : रीठा के फल की मज्जा (फल के बीच का भाग) को तम्बाकू की तरह हुक्के में रखकर पीने से बिच्छू का जहर खत्म हो जाता है।
रीठे के फल की गिरी को पीसकर उसमें बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर 1-2 ग्राम की गोलियां बना लें। इन गोलियों को 5-5 मिनट के बाद पानी के साथ 15 मिनट में ही 3 गोली लेने से बिच्छू का जहर खत्म हो जाता है।
रीठे के फल को पीसकर आंख में अंजन (काजल) की तरह लगाने से तथा दंषित (काटे हुए स्थान) पर लगाने से भी बिच्छू के जहर में लाभ होता है।
विषैले कीट : रीठे की गिरी को सिरके में पीसकर विषैले कीटों (कीड़ों) के काटने के स्थान पर लगाने से राहत मिलती है।
बालों का मुलायम होना : 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा और 40-40 ग्राम कपूर तथा रीठे के फल की गिरी, 250 ग्राम शिकाकाई, 200 ग्राम आंवला। सभी को एक साथ लेकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में पानी मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को बालों पर लगायें। इसके पश्चात बालों को गर्म पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अंदर की जूं-लींके मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं। रीठा, आंवला, शिकाकाई को मिलाने के बाद बाल धोने से बाल सिल्की, चमकदार, रूसी-रहित और घने हो जाते हैं।
श्वास या दमा का रोग : श्वास कास (दमा) में कफ निकालने के लिए रीठे का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से 1.20 ग्राम देते हैं। इससे उल्टी होकर कफ निकल जाता है।
रीठे के महीन चूर्ण का नस्य देने से भी श्वास रोग (दमा) में आराम मिलता है।
बालों को काला करना : 250-250 ग्राम रीठा और सूखा आंवला पिसा हुआ और 25-25 ग्राम शिकाकाई की फली, मेंहदी की सूखी पत्तियां तथा नागरमोथा को मिलाकर एक साथ पीस लें। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। शैम्पू तैयार है। इसका एक बड़ा चम्मच पानी में उबालकर इससे सिर को धोयें। इससे सफेद बालों में कालापन आ जाएगा।
पायरिया : 250 ग्राम रीठा के छिलके को भूनकर और बारीक पीसकर मंजन बना लें। रोजाना चौथाई चम्मच रीठे की राख में 5 बूंद सरसों का तेल मिलाकर मंजन करें। इससे लगातार 2 महीने तक मंजन करने से पायरिया रोग ठीक हो जाता है।
रतौंधी (रात में न दिखाई देना) : रीठे को पानी के साथ पीसकर रोजाना 2 से 3 बार आंखों में लगाने से रतौंधी (रात मे न दिखाई देना) रोग में लाभ होता है।
2 रीठे के छिलके को रात को पानी में भिगोकर और सुबह पानी में ही मसल और छानकर इस पानी में सलाई डुबोकर दोनों आंखों में लगाने से रतौंधी (रात में न दिखाई देना) रोग ठीक हो जाता है।
रीठे के छिलके को पीसकर पानी में मिलाकर सुबह सूरज उगने से पहले नाक में डालने से रतौंधी (रात में न दिखाई देना) का रोग दूर हो जाता है।
उल्टी कराने वाली औषधियां : 3.50 मिलीलीटर से 7 मिलीलीटर तक रीठे का चूर्ण रोगी को पिलाने से उल्टी होना शुरू हो जाती है।
दस्त : 1 रीठे को आधा लीटर पानी में पकाकर ठंडा करके फिर उस पानी को आधे कप की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम पीने से दस्त आना बंद हो जाता है।
अरीठा या रीठा का चूर्ण नाक से सूंघने से आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द खत्म हो जाता है।

Disclaimer:- प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

रविवार, 4 जनवरी 2026

पुश्तैनी संपत्ति में अपना हक कैसे लें?

सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के नए नियमों और स्पष्ट दिशानिर्देशों के बाद अब पुश्तैनी संपत्ति में अधिकारों को लेकर स्थिति पहले से कहीं ज़्यादा साफ हो गई है।

जानिए आपके अधिकार…!?
पुश्तैनी संपत्ति क्या हैं?

जन्म से अधिकार किसे मिलता है?
बेटा-बेटी का समान हक
बँटवारे (पार्टीशन) की कानूनी प्रक्रिया
बिना सहमति बिक्री कब अवैध होगी?
'कोर्ट में दावा कैसे और कब करें?

महत्वपूर्ण बातः- पुश्तैनी संपत्ति में अधिकार मांगने से नहीं, बल्कि कानून से मिलते हैं - सही जानकारी बेहद ज़रूरी है।

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

2026 Hindu Festival Calendar: देखें साल 2026 के त्योहारों की पूरी लिस्ट, कब है होली?

जनवरी के व्रत-त्योहार 2026 (January 2026 Hindu Calendar Festival)

1 जनवरी- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
3 जनवरी - पौष पूर्णिमा व्रत
6 जनवरी- संकष्टी चतुर्थी
13 जनवरी - लोहड़ी
14 जनवरी - षटतिला एकादशी, पोंगल, उत्तरायण, मकर संक्रांति
16 जनवरी - प्रदोष व्रत (कृष्ण), मासिक शिवरात्रि
18 जनवरी - माघ अमावस्या
23 जनवरी - बसंत पंचमी, सरस्वती पूजा
29 जनवरी - जया एकादशी
30 जनवरी - प्रदोष व्रत (शुक्ल)।

फरवरी के व्रत-त्योहार 2026 (February 2026 Hindu Calendar Festival)

1 फरवरी- माघ पूर्णिमा व्रत
5 फरवरी - संकष्टी चतुर्थी
13 फरवरी - विजया एकादशी, कुम्भ संक्रांति
14 फरवरी - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 फरवरी - महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
17 फरवरी - फाल्गुन अमावस्या
27 फरवरी - आमलकी एकादशी
28 फरवरी- प्रदोष व्रत (शुक्ल)।

मार्च के व्रत-त्योहार 2026 (March 2026 Hindu Calendar Festival)

3 मार्च - होलिका दहन, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
4 मार्च - होली
6 मार्च- संकष्टी चतुर्थी
15 मार्च- पापमोचिनी एकादशी, मीन संक्रांति
16 मार्च - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
17 मार्च - मासिक शिवरात्रि
19 मार्च - चैत्र नवरात्रि, घटस्थापना, गुड़ी पड़वा
20 मार्च - चेटी चंड
26 मार्च - राम नवमी
27 मार्च - चैत्र नवरात्रि पारणा
29 मार्च - कामदा एकादशी
30 मार्च - प्रदोष व्रत (शुक्ल)।

अप्रैल के व्रत-त्योहार 2026 (April 2026 Hindu Calendar Festival)

2 अप्रैल- हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा व्रत
5 अप्रैल - संकष्टी चतुर्थी
13 अप्रैल - वरुथिनी एकादशी
14 अप्रैल- मेष संक्रांति
15 अप्रैल- मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
17 अप्रैल - वैशाख अमावस्या
19 अप्रैल - अक्षय तृतीया
27 अप्रैल - मोहिनी एकादशी
28 अप्रैल - प्रदोष व्रत (शुक्ल)।

मई के व्रत-त्योहार 2026 (May 2026 Hindu Calendar Festival)

1 मई - वैशाख पूर्णिमा व्रत
5 मई - संकष्टी चतुर्थी
13 मई- अपरा एकादशी
14 मई - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 मई - मासिक शिवरात्रि, वृष संक्रांति
16 मई - ज्येष्ठ अमावस्या
27 मई - पद्मिनी एकादशी
28 मई - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
31 मई- पूर्णिमा व्रत।

जून के व्रत-त्योहार 2026 (June 2026 Hindu Calendar Festival)

3 जून- संकष्टी चतुर्थी
11 जून - परम एकादशी
12 जून- प्रदोष व्रत (कृष्ण)
13 जून - मासिक शिवरात्रि
15 जून - अमावस्या, मिथुन संक्रांति
25 जून - निर्जला एकादशी
27 जून - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 जून - ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत।

जुलाई के व्रत-त्योहार 2026 (July 2026 Hindu Calendar Festival)

3 जुलाई - संकष्टी चतुर्थी
10 जुलाई- योगिनी एकादशी
12 जुलाई - मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
14 जुलाई- आषाढ़ अमावस्या
16 जुलाई - जगन्नाथ रथ यात्रा, कर्क संक्रांति
25 जुलाई, शनिवार - देवशयनी एकादशी, अषाढ़ी एकादशी
26 जुलाई, रविवार - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
29 जुलाई, बुधवार - गुरु-पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा व्रत।

अगस्त के व्रत-त्योहार 2026 (August 2026 Hindu Calendar Festival)

2 अगस्त - संकष्टी चतुर्थी
9 अगस्त- कामिका एकादशी
10 अगस्त, - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
11 अगस्त- मासिक शिवरात्रि
12 अगस्त - श्रावण अमावस्या
15 अगस्त - हरियाली तीज
17 अगस्त- नाग पंचमी, सिंह संक्रांति
23 अगस्त,- श्रावण पुत्रदा एकादशी
25 अगस्त - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
26 अगस्त ओणम/थिरुवोणम
28 अगस्त - रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा व्रत
31 अगस्त - संकष्टी चतुर्थी, कजरी तीज

सितंबर के व्रत-त्योहार 2026 (September 2026 Hindu Calendar Festival)

4 सितंबर, - जन्माष्टमी
7 सितंबर- अजा एकादशी
8 सितंबर, - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
9 सितंबर- मासिक शिवरात्रि
11 सितंबर - भाद्रपद अमावस्या
14 सितंबर - गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज
17 सितंबर - कन्या संक्रांति
22 सितंबर - परिवर्तिनी एकादशी
24 सितंबर- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
25 सितंबर - अनंत चतुर्दशी
26 सितंबर - भाद्रपद पूर्णिमा व्रत
29 सितंबर- संकष्टी चतुर्थी।

अक्टूबर के व्रत-त्योहार 2026 (October 2026 Hindu Calendar Festival)

6 अक्टूबर- इन्दिरा एकादशी
8 अक्टूबर- मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
10 अक्टूबर - अश्विन अमावस्या
11 अक्टूबर - शरद नवरात्रि, घटस्थापना
16 अक्टूबर - कल्परम्भ
17 अक्टूबर - नवपत्रिका पूजा, तुला संक्रांति
19 अक्टूबर - दुर्गा महा नवमी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
20 अक्टूबर - दशहरा, शरद नवरात्रि पारण
21 अक्टूबर- दुर्गा विसर्जन
22 अक्टूबर - पापांकुशा एकादशी
23 अक्टूबर - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
26 अक्टूबर - अश्विन पूर्णिमा व्रत
29 अक्टूबर - संकष्टी चतुर्थी, करवा चौथ।

नवंबर के व्रत-त्योहार 2026 (November 2026 Hindu Calendar Festival)

5 नवंबर- रमा एकादशी
6 नवंबर - धनतेरस, प्रदोष व्रत (कृष्ण)
7 नवंबर- मासिक शिवरात्रि
8 नवंबर - दिवाली, नरक चतुर्दशी
9 नवंबर- कार्तिक अमावस्या
10 नवंबर- गोवर्धन पूजा
11 नवंबर - भाई दूज
15 नवंबर - छठ पूजा
16 नवंबर- वृश्चिक संक्रांति
20 नवंबर - देवुत्थान एकादशी
22 नवंबर - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
24 नवंबर - कार्तिक पूर्णिमा व्रत
27 नवंबर - संकष्टी चतुर्थी

दिसंबर के व्रत-त्योहार 2026 (December 2026 Hindu Calendar Festival)

4 दिसंबर - उत्पन्ना एकादशी
6 दिसंबर - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
7 दिसंबर- मासिक शिवरात्रि
8 दिसंबर- मार्गशीर्ष अमावस्या
16 दिसंबर- धनु संक्रांति
20 दिसंबर- मोक्षदा एकादशी
21 दिसंबर - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
23 दिसंबर- मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत
26 दिसंबर - संकष्टी चतुर्थी।

मंगलवार, 18 नवंबर 2025

आयुर्वेद में पुरुषोंˈ के लिए अमृत है ये पौधा कहीं मिल जाए तो जरूर ले जाये घर…!!

आयुर्वेद (आयुः + वेद = आयुर्वेद) विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। ‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का अमृत रूपी ज्ञान’ और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है।आयुर्वेद, भारतीय आयुर्विज्ञान है।

आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका सम्बन्ध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है।
(अर्थात जिस ग्रंथ में – हित आयु (जीवन के अनुकूल), अहित आयु (जीवन के प्रतिकूल), सुख आयु (स्वस्थ जीवन), एवं दुःख आयु (रोग अवस्था) – इनका वर्णन हो उसे आयुर्वेद कहते हैं।)

हम आपको आयुर्वेद के अनुसार एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि हमारे शरीर के लिए कॉफी ज्यादा फायदेमंद है, आप सभी ने इस पौधे का नाम जरूर सुना होगा, क्योंकि यह पौधा कहीं पर भी आसानी से मिल जाता है, इस पौधे को भांग के नाम से जानते हैं, यह पौधा औषधि गुणों से भरा हुआ है, आपको बता दें भांग के मादा पौधे में स्थित मंजरिया से निकले राल से गांजा प्राप्त किया जाता है, भांग के पौधे के अंदर कैनाबिनोल नामक एक रासायनिक तत्व पाया जाता है,

इसीलिए यह पित्त वे कफ नाशक होता है, यदि आप भांग चरस या गांजे की लेत से पीड़ित है तो यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, इसीलिए इसे सही डोज में लिया जाए तो यह कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है और इसकी पुष्टि विज्ञान भी कर चुका है।

1.यदि आप बहुत कम और सीमित मात्रा में भांग का सेवन करते हैं तो इससे आपकी इंद्रियां और संवेदनाओं की तीव्रता में बढ़ोतरी होती है| जिससे स्पष्ट सुनाई और दिखाई देना लगता है, इसका सेवन खराब मूड को भी सुधार सकता है।

2.भांग के पत्तों को निचोड़ कर 8 से 10 बूंदों को कान में डालने से कीड़े मरते हैं और कान की पीड़ा दूर हो जाती है

3.सर में होने वाले दर्द को दूर करने के लिए भांग के पत्तों को बारीक पीसकर सूंघने से भी सिर का दर्द दूर हो जाता है।

4.भुनी हुई 125 मिलीग्राम भांग को 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम मिश्री में मिलाकर सेवन करने से दमा का रोग दूर हो जाता है।

5.भांग के बीजों में प्रोटीन वे 20 तरह के अमीनो एसिड्स मौजूद होते हैं जो कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए लाभदायक है, वर्कआउट करने के बाद भांग के बीजों को जूस में मिलाकर पीने से फायदा होता है।

सोमवार, 10 नवंबर 2025

🌞 चार उपलब्धियों के चार प्रकार 🌞

🚩🙏🏻 राधे राधे जी।🙏🏻🚩

आरोग्य, धन, ज्ञान और मोक्ष इन चार चीजों को पाने के लिए चार प्रकार के प्रयत्न करने पड़ते हैं। इनको देने वाले देवता अलग अलग हैं। आरोग्य अर्थात् बीमारी रहित जीवन की आकांक्षा से भगवान सूर्य की आराधना करनी चाहिए। 

     धन की प्रचुरता के लिए अग्नि देवता की आराधना करनी चाहिए। ज्ञान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। शिवजी की आराधना से लौकिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की विद्या मिलती है। मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान नारायण की आराधना करनी चाहिए। 

इस संदर्भ में मत्स्य:- पुराण में महत्वपूर्ण निर्देश मिलता है:-

आरोग्यं भास्करादिच्छेत् धनमिच्छेद् हुताशनात्।
ईश्वरात् ज्ञानमिच्छेच्च मोक्षमिच्छेत् जनार्दनात्।।
             
शरीर धारण करने के लिए आत्माओं का निर्गमन विष्णु से ही होता है। अतः मोक्ष भी विष्णु की आराधना से मिलता है।

सूर्य देवता की नित्य आराधना से व्यक्ति कभी भी किसी बड़ी बीमारी का शिकार नहीं होता है। भगवान सूर्य धन और यश भी देते हैं:-

शरीरारोग्य-कृच्चैव धनवृद्धि-यशस्कर:।
जायते नात्र संदेहो यस्य तुष्येत् दिवाकरः।।
             
लोग भूल गए अग्नि देवता की आराधना। इसीलिए
पवित्र कर्म वालों को दरिद्रता घेरे रहती है। यदि आप पवित्र ढंग से जीते हुए धनी भी रहना चाहते हैं तो प्रतिदिन अग्नि की पूजा कीजिये।

🦅ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। 🦅

शनिवार, 5 जुलाई 2025

ये वो दवाई है.! जिसे दिन में सिर्फ़ 4 चम्मच लेने से ही कैंसर खत्म..जानकारी अच्छी लगे तो शेयर जरुर करें ताकि किसी की जिन्दगी बच सके!


दुनिया भर के अरबों लोग कैंसर से पीड़ित हैं, आज के समय की यह सबसे घातक बीमारी है। लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि यह रूसी वैज्ञानिक डॉ. मेर्मेर्सकी (Hristo Mermerski) द्वारा की खोजे एक प्राकृतिक उपचार से ठीक किया जा सकता है।
रूस के एक वैज्ञानिक डॉ. मेर्मेर्सकी (Hristo Mermerski) ने घर में बनाई जाने वाली एक इसी औषधि इजाद की है जिस के इस्तेमाल से बहुत सी भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारियो अथवा कैंसर जैसे जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है। ये औषधि कई प्रकार के कैंसर के इलाज में फ़ायदेमंद हो सकती है।

दुनिया की ऐसी बहुत सी बड़ी बड़ी लाइलाज बीमारियाँ है जिनका इलाज संभव नहीं है और इसकी वजह से लोग मर जाते हैं। फिर वो चाहे एड्स हो या कैंसर हो या ट्यूमर हो। ये बीमारियाँ शुरू में तो पकड में नहीं आती हैं और जब तक इनका पता चलता है तब तक ये हाथ से बाहर होती हैं। कितनी ही मासूम जानों को हमने इन बीमारियों की वजह से खोते हुए देखा है। लोग दावा तो करते हैं कि इनका इलाज कहीं आयुर्वेदा में है या किसी तांत्रिक के पास है लेकिन आजतक इस बारे में कुछ ढंग का देखने को मिला नहीं है।

इस बीमारी से देश दुनिया में अरबों लोग ग्रसित हैं और ये बीमारी आज के दौर की सबसे घातक बीमारी बन के सामने आई है। लेकिन कुछ सुखद इस बारे में सुनने को मिल रहा है क्योकि बहुत से लोग इस बात का दावा कर रहे हैं कि रूसी वैज्ञानिक हृस्तो मेर्मेर्सकी ने एक ऐसा प्राकृतिक उपचार का इजाद किया है जिससे इस बीमारी का इलाज संभव हुआ है। रूसी वैज्ञानिक ने घर में बनने वाली ऐसी नायाब दवाई खोजी है जिसको प्रयोग करने पर केंसर सहित बहुत सी और भी बीमारियाँ दूर की जा सकती हैं। ये दवाई कैंसर के तमाम प्रकार के फॉर्म्स को सही करने में सक्षम बताई जा रही है।

डॉ. मेर्मेर्सकी के अनुसार ये औषधि लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन के लिए सहायक है। ये कैंसर के इलाज में बहुत लाभकारी है और साथ ही जवान दिखने और शारीरिक ताकत के लिए भी फायदेमंद है। ये शरीर में मेटाबोलिज्म को बढाता है, गुर्दों और लीवर को साफ़ करता है, शरीर में बिमारिओं से लरने की शक्ति पैदा करता है और दिल के दौरे से बचाता है।

आइये जानते है इस औषधि को तैयार करने की आवश्यक सामग्री के बारे में :

1. 400 ग्राम ताजा अखरोट।
2. 400 ग्राम अंकुरित अनाज गेंहू।
3. 1 किलो प्राकृतिक शहद।

4. 12 ताजा लहसुन की कलियाँ।
5. 15 ताजा निम्बू।

अंकुरित अनाज तेयार करने का तरीका :- 
अनाज को एक कांच के बर्तन में रख दे उस में उतना पानी डालें जिस से अनाज अच्छी तरह भीग जाए। इसे एक रात के लिए इसी तरह छोड़ दें अगली सुबह अनाज को निकाल कर छान पानी निकाल दें अच्छी तरह पानी से धोने के बाद अनाज में से सारा पानी निकल दें। पानी निकालने के बाद अनाज को दोबारा कांच के बर्तन में ढाल कर 24 घंटे तक रखें। इस से अंकुरित अनाज तयार हो जायेगा।

औषधि तैयार करने की विधि :- 
लहसुन की कलियाँ,अंकुरित अनाज और अखरोट को एक साथ पीस लें, 5 नीम्बू बिना छिलका फेंके पीस ले, बाकी के बचे 10 नीम्बू का रस इसमें निचोड़ दें, अब सब चीजों को अच्छे से मिला दें, अब इसमें लकड़ी की चम्मच से शहद अच्छी तरह मिलाएं और इस मिश्रण को एक कांच के जार में भरके फ्रिज में रख दें।
सेवन करने का तरिका :- 
डॉ मेर्मेर्सकी के अनुसार इसे सोने के आधा घंटे पहले लें और हर बार खाना खाने के आधे घंटे पहले लें। अगर कैंसर के इलाज हेतू ले रहे हैं तो हर 2 घंटे में इसे 2-2 चम्मच लेते रहें। ये कैंसर के लिए तो फायदेमंद है ही उसके साथ ये आपको जवान और ताकतवर बनाने में भी मददगार है।